लखनऊ: बेटा यूपी में कैबिनेट मंत्री, बाप अपने बेटे की रैली के लिए बना रहे झण्डा

लखनऊ। बेटा उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के साथ राजनैतिक दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष हो और उनके पिताजी अपने बेटे के होने वाली चुनावी रैली के लिए झंडा बनाये, इससे न सिर्फ उस बेटा को राजनैतिक क्षेत्र में काम करने का और जुनून पैदा होगा बल्कि कार्यकर्ता भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पार्टी के प्रचार प्रसार में लग झण्डा और बुलन्द करेंगे।
भासपा पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पीयूष मिश्रा ने जानकारी दी की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पिता एवं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरून राजभर के 80 वर्षीय दादा सन्नू राजभर उर्फ पक्का सरदार  27 अक्टूबर 2018 को लखनऊ में रमाबाई अम्बेडकर मैदान में होने वाली महारैली के लिए झण्डा तैयार करने में जी जान से लगे हैं। वे कार्यकर्ताओं के साथ आगामी होने वाली रैली के लिए सुभासपा का इतना झण्डा तैयार कर देना चाहते हैं कि रमाबाई अम्बेडकर मैदान में होने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुलामी छोड़ो, समाज जोड़ो अतिपिछड़ा, अतिदलित भागीदारी महारैली सुभासपा के पीले झंडे से पट जाए और उनके बेटे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के शब्दों की गूंज पूरे देश के कोने कोने में जाए।
आज के आपाधापी युग में जब मंत्री विधायक और राजनीतिक दलों के नेताओं के बेटे और परिवारजन सत्ता की सुख की चासनी में तरह-तरह का सुख बटोरने में लगे हैं वैसे मैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के पिता सन्नू राजभर का अपने बेटे की रैली के लिए झंडा बनाना अपने आप में अलग ही बानगी कहता है। कहीं ना कहीं सन्नूू राजभर की इस कार्य से पार्टी के कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों के साथ खुद ओमप्रकाश राजभर को ताकत मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पिता सन्नू राजभर का कहना है कि अभी बेटे को और आगे जाना है। वे बेटे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देखना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा ही गरीब और मजलूमों का हर समस्याा का समाधान कर सकता है। कहना है कि जब तक बेटा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन ना हो जाए वह अपने बेटे के लिए झंंडा बनाते रहेंंगे।
ऐसे में ओमप्रकाश राजभर के पिता के इस कार्य से अन्य दलों के नेताओं के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के लोगों को एक सीख भी मिलेगी। केवल सत्ता सुख से ही पार्टी नहीं चलती वास्तव में जब सत्ता सुख मिले तो बीते दिनों का दर्द याद हो और आप उस रास्ते पर चलते रहे वह पार्टी के लिए और ही अहमियत रखती है।

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