उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ा प्रशासनिक तोहफा देने की प्रक्रिया तेज कर दी है. लंबे समय से लंबित पड़ी पदोन्नतियां (Promotions) अब तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएंगी, जिससे साढ़े आठ लाख से अधिक राज्य कर्मियों को सीधा फायदा मिलेगा. मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी विभागाध्यक्षों को मानव संपदा पोर्टल के जरिए विभागीय पदोन्नति कमेटी (DPC) की प्रक्रिया को फौरन पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.
⏱️ चयन वर्ष के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव
योगी कैबिनेट ने कर्मचारियों की पदोन्नति की राह को सुगम बनाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती का वर्ष की परिभाषा का प्रतिस्थापन) नियमावली 2026’ को मंजूरी दी है.
- कैलेंडर वर्ष व्यवस्था: पहले भर्ती और प्रमोशन के लिए ‘चयन वर्ष’ 1 जुलाई से शुरू होकर अगले साल 30 जून तक चलता था. अब इसे बदलकर ‘कैलेंडर वर्ष’ यानी 1 जनवरी से 31 दिसंबर कर दिया गया है.
- कट-ऑफ डेट में बदलाव: पात्रता की कट-ऑफ डेट को जुलाई के स्थान पर दिसंबर करने की तैयारी है.
- किसे होगा फायदा: इस छोटे बदलाव से जनवरी से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त (Retire) होने वाले उन कर्मचारियों को भी प्रमोशन का लाभ मिलेगा, जो पहले सेवा अवधि की गणना के कारण इससे वंचित रह जाते थे.
📅 समय सीमा (Deadlines) का निर्धारण
शासकीय कार्यों की गति बढ़ाने और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त टाइमलाइन तय की है:
- 30 जून 2026 तक: चालू चयन वर्ष 2026 (जो 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक है) के लिए पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों की गणना पूरी करनी होगी.
- जून का प्रथम सप्ताह: जिन पदों की डीपीसी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होनी है, उन्हें जून के पहले हफ्ते में ही पूरा कर लिया जाएगा.
- जनवरी 2027 तक: आगामी चयन वर्ष 2027 की रिक्तियों की गणना जनवरी 2027 में करके 15 जनवरी तक प्रोन्नतियां कर दी जाएंगी.
- अधियाचन की गति: लोकसेवा आयोग (UPPSC) के जरिए भरे जाने वाले पदों का अधियाचन (Requisition) तुरंत भेजने का आदेश दिया गया है.
⚖️ चुनावी समीकरण और प्रशासनिक दांव
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है:
- बड़ा वोट बैंक: उत्तर प्रदेश में 8.5 लाख से ज्यादा नियमित राज्य कर्मचारी हैं. उनके परिवारों को मिलाकर यह एक विशाल वोट बैंक बनता है, जिसे चुनाव से पहले साधने की कोशिश है.
- पुलिस और सचिवालय को राहत: इस त्वरित पदोन्नति अभियान का सबसे बड़ा फायदा पुलिस महकमे के अफसरों, शिक्षा विभाग और सचिवालय सेवा के कर्मियों को मिलेगा.
सरकार के इस कदम से न सिर्फ कर्मचारियों की वर्षों पुरानी पदोन्नति की मांग पूरी होगी, बल्कि चुनावी साल में प्रशासनिक मशीनरी की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी.
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